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क्या बसों में सीटों से अधिक सवारियां न बिठाने से सड़क हादसे रुक जायेंगे

कुल्लू जिले के बंजार में एक भयावह बस हादसा हुआ जिसमें 45 लोगों की मौत हो गयी. इस हादसे ने सोये हुए प्रशासन को जगा दिया. हर हादसे के बाद ऐसा होता है. प्रशासन सोया रहता है, जब कोई हादसा होता है तो जाग जाता है. फिर हादसे की जाँच के आदेश दिए जाते है. गुमनामी में जाँच होती है और जाँच रिपोर्ट भी गुमनामी में किसी अलमारी के किसी हिस्से में दबा दी जाती है.

हादसा क्यों हुआ और आगे हादसे न हो इस पर क्या किया या किया जाये कोई परवाह नहीं करता. हालाँकि परिवहन मंत्री ने बहुत जल्दी जाँच करके बस को तो क्लीन चित दे दी है लेकिन इस बार प्रशासन कुछ गहरी नींद से जागा है. जब बस को 75 से अधिक सवारियां धोने से नहीं रोक पाए तो अब आनन् फानन में तुगलकी फरमान जारी कर दिया की बस में एक यात्री भी अधिक हुआ तो बस का चालान कर दिया जायेगा.

अब इस फरमान का असर किस पर पड़ेगा. चालान के डर से बस चालक व परिचालक अतिरिक्त सवारियों को उठाने से मना कर दे रहे हैं जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पद रहा है. सबसे अधिक परेशानी स्कूली छात्रों को हो रही है. क्योंकि स्कूल की छुट्टी के समय अधिकतर बसों में सीट नहीं मिलती है और छात्रों को अक्सर खड़े खड़े ही सफर करना पड़ता है. ये सफर भी 4-5 किलोमीटर से अधिक नहीं होता है.

फरमान तो निकल दिया. लेकिन ये फरमान निकलने से पहले इस बात पर विचार किया गया की हमारे पास इतनी परिवहन क्षमता है कि सवारियों को बिना ओवेरलोडिंग के उनके गंतव्य पर पहुंचा सके.

कहीं भी चले जाइये शाम के वक़्त हमेशा ही बस क्षमता से अधिक सवारियां बस अड्डों या स्टॉप पर खड़ी मिलेगी. ईनमसे से बह्तों ने 5-10 किमी ही सफर केना होता है. बहुत से रूटों पर बसें सीमित होने के कारण लोगों को कई घंटे बसों का इंतज़ार करना पड़ेगा या पैसे खर्च करके टैक्सी से सफर करना पड़ेगा. वहीँ कई ऐसे रूट हैं जहाँ दिन में मात्रा एक बस आती जाती है और सवारियां बस की क्षमता से अधिक होती है. तो ऐसे में उन अतिरिक्त सवारियों के लिए परिवहन विभाग ने कोई योजना नहीं बनाई और फरमान सुना दिया गया. क्योंकि परेशानी झेलने का ज़िम्मा जनता ने ही उठा रखा है.

परिवहन मंत्री ने 200 बसें खरीदने की बात ज़रूर कही है सवाल ये है की उन्हें आने में कितना समय लगेगा? क्या ये बसों की ज़रूरत को पूरा करने के लिए काफी है? और क्या इन बसों के आने तक जनता ऐसे ही परेशान होती रहेगी?

बहुत से मामलों में देखा गया है कि दुर्घटनाओं को एक बड़ी वजह ख़राब सड़कें होती हैं. सड़कों में गड्ढे, पर्याप्त चौड़ाई न होना या क्रैश बैरियर न होने कि वजह से बहुत दुर्घटनाये होती है. क्या कभी प्रशासन ने इन कारणों से सड़क हादसों को रोकने के लिए कोई योजना बनाई? जब तक सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी सड़क हादसे होते रहेंगे.

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