News

धर्मशाला, पच्छाद की टक्कर, कौन मारेगा बाज़ी?

आने वाली 21 तारीख को प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं. ये सीटें हैं धर्मशाला और सिरमौर जिले की पच्छाद विधानसभा. ये दोनों सीटें यहाँ के विधायकों के लोकसभा चुनाव जीतने के कारण खाली हुई थीं. धर्मशाला से भाजपा के किशन कपूर तथा पच्छाद से भाजपा के ही सुरेश कश्यप सांसद निर्वाचित हुए थे.

प्रदेश में जय राम ठाकुर की सरकार को दो साल पूरे होने को है. तो क्या ये उपचुनाव जय राम सरकार द्वारा दो साल में लिए गए कामों की समीक्षा होगी?

धर्मशाला विधानसभा

जय राम सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर के लोकसभा चुनाव जीतने से खली हुई धर्मशाला सीट पर इस बार मुकाबला है गद्दी समुदाय से सम्बन्ध रखने वाले दो युवा चेहरों के बीच. कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के चुनाव लड़ने से इंकार करने पर युवा कांग्रेस के नेता विजय इन्दर करण को टिकट दिया. विजय इन्दर कांगड़ा संसदीय सीट से युवा कांग्रेस के प्रभारी हैं. वहीं भाजपा ने भरी खींचतान के बाद टिकट विशाल नेहरिया को दिया है. ये वही विशाल नेहरिया है जिनके समर्थकों ने फतेहपुर में युवा मोर्चा रैली में प्रदर्शन किया था. दोनों प्रत्याशियों के युवा और एक ही समुदाय का होने से धर्मशाल का चुनाव टक्कर कांटे की बन गया है.

पच्छाद विधानसभा

पच्छाद विधानसभा का ये चुनावी सफर शुरू से ही बहुत नाटकीय रहा. कांग्रेस ने अपने कद्दावर नेता गंगूराम मुसाफिर पर भरोसा जताया वहीँ भाजपा ने युवा और महिला चेहरे को तवज्जो देते हुए रीना कश्यप को उम्मीदवार बनाया. लेकिन भाजपा में दो बागी नेताओं के आजाद उम्मीदवार भरने के बाद बहुत खींचतान वाली स्थिति रही ये बागी नेता थे एबीवीपी के आशीष सिकता और जिला परिषद् सदस्य दयाल प्यारी. सिकता से तो जैसे तैसे भाजपा ने नामांकन वापिस करवा लिया लेकिन दयाल प्यारी को समझने की कोशिश नाकाम रही.

दयाल प्यारी के चुनाव में बने रहने के कारण भाजपा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. दयाल प्यारी तीन बार जिला परिषद् चुनाव जीती हैं और एक बार जिला परिषद् अध्यक्ष भी रहीं हैं. खास बात यह है की वह तीनों बार अलग वार्ड से चुनाव जीती हैं. और जब जिला परिषद् अध्यक्ष बानी तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पच्छाद के वोटरों में दयाल प्यारी का कितना असर है. साथ ही सिक्टा समर्थकों के दयाल प्यारी के समर्थन में आने से दयाल प्यारी के चुनावी प्रचार को और मजबूती मिली है. कुल मिलकर पच्छाद में मुकाबला त्रिकोणीय है. देखना दिलचस्प होगा कि बाजी कौन मारेगा.

दोनों पार्टियों ने इन चुनावों में अपना पूरा ज़ोर झोंक दिया है. भाजपा के लिए यह दो सालों में किये गए कामों की अग्निपरीक्षा होगी. इन चुनावों में जीत भाजपा के दो सालों के कामों पर मुहर लगाएगी. वही कांग्रेस अगर ये उपचुनाव जीतती है तो यह उनके लिए एक मनोबल की जीत होगी. खैर फैसला जानने के लिए 24 तारिख का इंतज़ार करना पड़ेगा.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *