Politics लेख

एक खत हिमाचल के मतदाताओं के नाम

5 साल हो गए, जब आपने कुछ लोगों को विधानसभा भेजा था अपने प्रतिनिधि के तौर पर. कुछ उम्मीद के साथ, कुछ वादों के साथ. ये 5 साल कैसे रहे, कितना विकास हुआ प्रदेश में भी और आपके क्षेत्र में भी, कितने वादे पुरे हुए कितने अधूरे रह गए? आपके विधायक, मंत्री, सरकार तथा विपक्ष भी आपकी उम्मीदों पर खरा उतरे या नहीं? इन सब की समीक्षा का समय आ गया है. और ये समय है आने वाले पांच साल के लिए चुने जाने वाले प्रतिनिधियों के अवलोकन का. किस पार्टी की सरकार बनेगी कौन आपके क्षेत्र से विधायक होगा?

इन सबकी ज़िम्मेवारी आपके हाथों में है. आपके द्वारा दबाया हुआ एक एक बटन निश्चित करेगा की आने वाले पांच साल के लिए प्रदेश के विकास की जिम्मेवारी किसके हाथ में होगी.

दोनों मुख्य पार्टियों के आलावा आजाद उम्मीदवारों ने भी नामांकन भर दिया है. अब दौर चलेगा का प्रचार का, रैलियों का, रोडशो और भाषणों का. कार्यकर्ता आपके घर द्वार पर आके आपसे वोट की गुहार लगाएंगे. जिन नेताओं के दर्शन 5 साल नहीं हुए वो भी आपके आगे हाथ जोड़े खड़े होंगे. फिर से वादे होंगे घोषणाएं होंगी, एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप होंगे, विकास के बड़े बड़े वादे किये जायेंगे.

लेकिन मैं सभी प्रदेशवासियों से एक अपील करना चाहता हूँ कि आप सभी अपनी जिम्मेवारी को अच्छे से निभाएं ऐसे विधायक ऐसी सरकार चुने जो पांच साल तक जनता कि आवाज़ सुने और हर आयाम में बिना किसी भेदभाव के एक समृद्ध हिमाचल के लिए काम करे.

लेकिन ये जिम्मेदारी सिर्फ वोट दे देने से पूरी नहीं होने वाली. एक सही नेता चुनने के लिए जाँच परख की ज़रूरत होती है, सवाल जवाब की ज़रूरत होती है. जोकि हमने न कभी किये न कभी करने का सोचा. यहां तक की हम घरेलु काम के लिए भी नौकर रखते हैं, घर बनाने के लिए मिस्त्री चुनते हैं तो ही कई तरह के सवाल जवाब करते हैं. एक छोटी से छोटी नौकरी के लिए  परीक्षा, सवाल जवाब होते हैं. लेकिन एक पूरी विधानसभा क्षेत्र के लिए एक प्रतिनिधि चुनने के लिए कोई सवाल जवाब नहीं. जो नेताओं कार्यकर्ताओं ने सुनाया पढ़ाया उसके आधार पर वोट दे दिया. या ये पार्टी नहीं वो पार्टी करके वोट दे दिया. या ये प्रत्याशी मेरे इलाके का है या मेरी जात का है तो उसे वोट दे दिया. या किसी दोस्त या रिश्तेदार ने कहा तो वोट दे दिया. न उसकी योग्यता परखी न क्षमता.

तो क्यों न इस बार के चुनाव से सवाल जवाब का सिलसिला शुरू करें. क्यों न हमारे क्षेत्र के उम्मीदवार हमरे क्षेत्र कि मांगों और समस्याओं को लेकर एक घोषणापत्र बनाये. जिसके आधार पर आने वाले समय में हम उन नेताओं कि जवाबदेही सुनिश्चित कर सके.

हमने काफी समय से 5-5 साल दोनों पार्टियों कि सरकारें देखी हैं. दोनों में से कोई भी पार्टी का कार्यकाल ऐसा नहीं रहा जो दूसरी कि अपेक्षा बहुत ही उत्कृष्ट हो तो ये बात कि फलानी पार्टी की सरकार बनेगी तो ही प्रदेश का विकास होगा ये सोचना मात्रा एक भ्रम होगा. या हमारे क्षेत्र का विधायक जीतने वाली पार्टी से होगा तो ही वह क्षेत्र का विकास करा पाएगा ये सोचना भी सही नहीं है. एक काबिल और साफ नीयत का नेता चाहे किसी भी पार्टी का क्यों न हो, विकास करवाने की क्षमता रखता है. तो हमें चाहिए कि हम 68 सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों को विधानसभा भेजें चाहे वो किसी भी पार्टी के हों अथवा आज़ाद हो. जब 68 काबिल लोग निजी अथवा पार्टी स्वार्थ को छोड़ कर प्रदेश हित में काम करेंगे तो विकास को कोई रोक नहीं सकता.

तो जब भी कोई नेता या कोई कार्यकर्ता आपके पास आये तो आप क्षेत्र के समस्याओं, अपनी मांगों, उम्मीदवारों के दृष्टिकोण से सम्बंधित सवाल जवाब कीजिये, सभी उम्मीदवारों कि तुलना कीजिये और एक काबिल व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि बनाकर विधानसभा भेजिए. अगर आइए कोई व्यक्ति न हो तो NOTA भी एक विकल्प है.

और हाँ वोट देने ज़रूर जाइये. ये आपका अधिकार है और इसका उपयोग ज़रूर और समझबूझ के साथ करें. किसी भी प्रकार के लालच या प्रलोभन में आकर अथवा क्षेत्र या जाति के आधार पर वोट न करें.

धन्यवाद,

सुनील डोगरा

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