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मनाली से रोहतांग के लिए शुरू हुई इलेक्ट्रिक बस सेवा

परिवहन मंत्री जी. एस. बाली ने आज पहले नवरात्र के अवसर पर कुल्लू से रोहतांग पास के लिए इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखा कर शुभारम्भ किया। उन्होंने खुद भी इस मनोरंजक सफर का आनंद लिया। उन्होंने बताया कि अभी कुल्लू में 10 और इलेक्ट्रिक बसें चलायी जाएँगी जो पर्यटन सीज़न के समय मनाली से रोहतांग चलेंगी तथा बाकि समय मनाली कुल्लू मंडी के बीच चलेंगी।इन बसों के चलने से स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यटकों को भी फायदा मिलेगा।


पिछले कुछ सालों से रोहतांग रूट पर वाहनों की अत्यधिक आवाजाही से प्रदुषण का स्तर काफी बढ़ गया है। इसको संज्ञान में लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मनाली से रोहतांग के लिए आने जाने वाले वाहनों की संख्या को नियंत्रित किया है। अब प्रतिदिन केवल 800 पेट्रोल तथा 400 डीज़ल वाहन ही रोहतांग जा सकते हैं।

इस बात को ध्यान में रखते हुए इस रुट पर प्रदुषण रहित बिजली से चलने वाली बसों का चलना प्रदुषण को कम करने की तरफ एक बेहतरीन कदम है। इस रुट पर इलेक्ट्रिक बस का परीक्षण पिछले साल अक्तूबर महीने में किया गया था। जिसकी सफलता के बाद इन बसों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

हिमाचल इलेक्ट्रिक बसें चलने वाला पहला पहाड़ी राज्य है। यह देश में परिवहन के क्षेत्र में एक नयी तरह की शुरुआत है। परिवहन मंत्री ने बताया कि प्रदेश में कुछ दिनों में ऐसी ही 50 बसें और आ रही हैं जिन्हे प्रदेश के अन्य शहरों में चलाया जायेगा।

परिवन मंत्री बाली ने इस अवसर पर संवादाताओं को भी सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में परिवहन की दिशा में आज का दिन ऐतिहासिक है इलेक्ट्रिक बस सार्वजनिक परिवहन में चलाने वाला हिमाचल प्रदेश अग्रणी राज्य बना है। दुनिया नए आविष्कारों और भविष्य की तरफ देख रही है। कई देशों ने अपने यंहा वाहनों को पूर्ण इलेक्ट्रिक करने के लिए टाइम लाइन तय कर दी है। भारत सरकार ने भी 2030 तक 3,00,000 बसों का टारगेट सेट किया है। मुझे ख़ुशी है प्रदेश की जनता को यह बताते हुए की नयेपन की इस दौड़ में हिमाचल प्रदेश पुरे देश को लीड करने जा रहा है। कुल्लू मनाली रोहतांग बस को हरी झंडी दिखाने के साथ ही 50 और इलेक्ट्रिक बसें भी प्रदेश की सड़कों पर दौड़ना शुरू करेंगीं।

उन्होंने भी कहा कि उन्होंने पिछले कार्यकाल में वॉल्वो बसों की शुरुआत की थी सार्वजनकि परिवहन सेवा में नार्थ इंडिया में लक्सेरी बस सुविधा देना वाला हिमाचल प्रदेश तब पहला राज्य बना था। उसके बाद पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों ने भी हमारे मॉडल को अपनाया था।

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