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मंडी जिले के कोटरोपी में जहाँ भूस्खलन की जगह बारिश के कारण सड़क धंसी, राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध

एक साल पहले, 13 अगस्त का वो मंज़र सबको याद होगा, जब मंडी जिले के कोटरोपी में विशाल भूस्खलन में कई लोगों की जान चली गयी थी. आज लगभग एक साल बाद कोटरोपी में भारी बारिश के बाद फिर से स्थिति ख़राब हो गयी है.

3 दिन से लगातार बारिश के बाद कोटरोपी में सड़क का एक हिस्सा पानी में बह गया. जिस वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग 154 बाधित हो गया है.
हालाँकि इस बार प्रशासन ने तत्परता दिखा कर समय पर गाड़ियों की आवाजाही बंद करवा दी थी. जिस कारण किसी तरह के जान मॉल का नुकसान नहीं हुआ. प्रशासन ने मंडी जोगिन्दर के बीच वाहनों की आवाजाही के लिए निर्देश जारी किये हैं. मंडी से जोगिन्दर नगर की ओर जाने वाली गाड़ियों को पधर से नौहली होकर और जोगिन्दर नगर से मंडी की तरफ जाने वाले वाहनों को घटासनी-झटींगरी-डायना पार्क-पधर होकर जाने के निर्देश दिए गए हैं.

कोटरोपी में पिछले साल पहाड़ी दरकने की वजह से भारी मात्रा में मलबा एक काफी बड़े हिस्से में फ़ैल गया था. इस घटना में एक पल बह गया था और सड़क भी मलबे में दब गयी थी. इस मलबे के ऊपर से ही सड़क मार्ग को बहाल कर दिया गया था. तीन दिन से हो रही भारी बारिश की वजह से आज करीब 5 बजे सड़क एक हिस्सा पानी में बह गया.

इस स्थान पर एक नाला था जिसमे बरसात में पानी का स्तर काफी बढ़ जाता था. लेकिन भारी मलबे के कारण पानी के बहाव में रूकावट हो गयी थी. हालाँकि बरसात शुरू होने के कुछ समय पहले प्रशासन ने धरातल पर इकठा हो रहे पानी की निकासी के इंतेज़ाम किये थे और एक नाली का निर्माण भी किया था. लेकिन जो मूल पानी था उसे निकालने का कोई इंतेज़ाम नहीं किया गया था. जिस कारण पानी मलबे के नीचे से ही रिस रहा था.

बारिश अधिक हो जाने से मलबे के निचे पानी के इकठा होने की वजह से सुबह से ही मिट्टी का कटान शुरू हो गया था. जोकि शाम होते होते सड़क के एक बड़े हिस्से को बहा कर ले गया. राष्ट्रीय राजमार्ग से नीचे साथ वाले गाँव में भी इस पानी की वजह से एक पुली और दो घरात के बह जाने की खबर है.

प्रशासन की नाकामी?

आज की इस घटना को किसी हद तक प्रशासन की नाकामी के रूप में देखा जा सकता है. भूस्खलन घटना के एक साल बीत जाने पर भी प्रशासन नाले के मूल पानी के कारण होने वाले खतरे का आकलन नहीं कर सका. अगर किसी तरह से इस पानी को निकलने की व्यवस्था की जाती तो आज सड़क धंसने का खतरा नहीं होता. इसके आलावा भूस्खलन से पहले की सड़क जोकि स्थायी ज़मीन पर थी, को पुनर्स्थापित किया होता तो भी आज ये स्थिति उत्पन्न न होती.

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