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अलविदा भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी

भारत की राजनीति में सबसे चहेते नेता पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी आज शाम इस दुनिया को छोड़कर चले गए. काफी समय से बीमार चल रहे 93 वर्ष के अटल जी ने शाम 5:05 पर अंतिम सांस ली. अटल जी काफी समय से बीमार चल रहे थे.

1924 में ग्वालियर में जन्मे अटल जी स्वाधीनता संग्राम से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करके देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे और 3 बार प्रधानमंत्री बने. पढ़िए उनके जीवन से जुड़े कुछ किस्से.

स्वाधीनता संग्राम से सफर शुरुआत

1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद केवल 16 वर्ष की आयु में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल गए.

सक्रिय राजनीति

1951 में जनसंघ से जुड़े और 1957 में लोकसभा के लिए चुने गए. 1962 में राज्यसभा सांसद बने. 1968 में जनसंघ के अध्यक्ष बने. 1975 में आपातकाल के दौरान भी जेल गए और आपातकाल के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री बने. 1980 में भाजपा के पहले अध्यक्ष बने. 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने. यह सरकार सिर्फ 13 दिन ही चल सकी. 1998 में फिर से प्रधानमंत्री बने. एक साल बाद 1999 में हुए आम चुनावों में तीसरी बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली. 2004 चुनावों में पार्टी की हार के बाद 2005 में राजनीति से सन्यास की घोषणा की.

महत्वपूर्ण कार्य

  • दलगत राजनीति से परे अटल जी की एक अलग पहचान थी विपक्षी दलों के नेता व कार्यकर्ताओं में भी अटल जी की एक खास जगह थी. यही कारण था की विपक्ष का नेता होते हुए भी तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हा राव ने उन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिनेवा भेजा था.
  • भारत को परमाणु शक्ति बनाने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान अटल जी का है. उन्होंने 1998 में अमरीका की नज़र के नीचे पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण करवाए थे.
  • भारत पाकिस्तान रिश्तों को सुधारने की तरफ भी अटल जी ने पहल की थी और दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा की शुरुआत की थी.
  • 1999-2004 कार्यकाल में अटल जी ने सर्व शिक्षा अभियान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अन्‍त्‍योदय अन्न योजना जैसी योजनाओं की शुरुआत की थी.

लेखक व कवि

अटल जी एक लेखक तथा कवि के रूप में बहुत विख्यात हुए. साथ ही अटल जी एक उच्च कोटि के वक्ता भी थे, उन्हें सुनने के लिए लाखों में भीड़ इकठा हुआ करती थी. उनके द्वारा लिखी हुई कविताएं आज भी गुनगुनाई जाती हैं. उनकी एक कविता ‘क्या खोया क्या पाया’ को जगजीत सिंह जी ने अपनी आवाज़ दी थी.. उनकी एक अन्य कविता की कुछ बेहतरीन पंक्तियाँ इस तरह से हैं.

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ
पावों के नीचे अंगारे
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ
निज हाथों में हँसते-हँसते
आग लगाकर जलना होगा
कदम मिलाकर चलना होगा.

हिमाचल से नाता

अटल जी का हिमाचल से एक खास रिश्ता था. वो हिमाचल को अपना दूसरा घर समझते थे. मनाली के प्रीणी गाँव में उनका घर है जहाँ वो छुटियाँ बिताने आया करते थे. मनाली पर लिखी उनकी एक कविता इस प्रकार से है.

आसमान में बिजली ज़्यादा,
घर में बिजली काम।
टेलीफ़ोन घूमते जाओ,
ज़्यादातर गुमसुम॥

बर्फ ढकीं पर्वतमालाएं,
नदियां, झरने, जंगल।
किन्नरियों का देश,
देवता डोले पल-पल॥

हरे-हरे बादाम वृक्ष पर,
लाडे खड़े चिलगोज़े।
गंधक मिला उबलता पानी,
खोई मणि को खोजे॥

दोनों बांह पसार,
बुलाती तुम्हे मनाली।
दावानल में मलयानिल सी,
महकी, मित्र, मनाली॥

सम्मान

अटल जी को 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. 2015 में अटल जी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया.

अटल जी ने अपने पुरे राजनीतिक जीवन में अपनी एक विशेष पहचान बनाई, हमेशा युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने रहे. विरले ही ऐसे लोग होंगे जो अटल जी की आलोचना करते होंगे. अटल जी विपक्षी पार्टियों के नताओं से भी उतना ही सम्मान पाते थे जितना अपनी पार्टी के नेताओं और आम जनता से. अटल जी ने भारत की राजनीति में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया जहाँ तक भविष्य में शायद ही कोई नेता पहुंच पाए.

अटल जी बेशक इस दुनिया से चले गए लेकिन उनके विचार, सिद्धांत और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. भारत की राजनीति में उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी.

भारत के इस महान नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि. भारत के राजनीति के पटल और लोगों के दिलों में आपका नाम हमेशा अटल रहेगा.

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